बिहार का 'आइस एप्पल': गर्मी का देसी अमृत, जिसे लोग 'तड़कुन' और 'ताड़ का कोवा' कहते हैं जब उत्तर भारत और खासकर बिहार में सूरज आग उगलने लगता है, तो शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए प्रकृति हमें एक अनमोल तोहफा देती है। इस तोहफे का नाम है आइस एप्पल (Ice Apple)। बिहार की आम बोलचाल में इसे 'तड़कुन' (मैथिली), 'तड़गोला' (भोजपुरी) या 'ताड़ का कोवा' कहा जाता है। दिखने में यह बिल्कुल बर्फ के टुकड़े या पारदर्शी जेली जैसा होता है। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बिहार का यह पारंपरिक फल क्यों हर सुपरफूड से बेहतर है। 1. क्या है तड़कुन (Ice Apple)? यह ताड़ (Palm) के पेड़ पर फलने वाला एक प्राकृतिक फल है। जब ताड़ के कड़े फल को ऊपर से काटा जाता है, तो उसके अंदर से तीन या चार पारदर्शी, मुलायम और रसीले कोवे निकलते हैं। इसके अंदर हल्का मीठा पानी भरा होता है, जिसका स्वाद काफी हद तक कच्चे नारियल पानी जैसा लगता है। 2. बिहार की संस्कृति और यादों से जुड़ाव बिहार के गांवों में गर्मियों की दोपहर का मतलब ही 'तड़कुन' होता है। * मई से जुलाई के महीनों में गांवों...
1. भूमिका (Introduction) – भारत का गौरवशाली इतिहास शुरुआत इस बात से करें कि भारत कभी दुनिया में शिक्षा का केंद्र था। एक समय था जब दुनिया भर से लोग पढ़ने के लिए भारत आते थे। तक्षशिला (Taxila) और नालंदा (Nalanda) जैसे विश्वविद्यालय इसका प्रमाण हैं, जहाँ विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र और दर्शनशास्त्र की शिक्षा दी जाती थी। चिकित्सा में सुश्रुत और गणित में आर्यभट्ट जैसे दिग्गजों ने भारत की धरती पर ही जन्म लिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि जो देश कभी दुनिया को शिक्षा देता था, वह आधुनिक समय में वैश्विक स्तर पर पीछे क्यों रह गया? आइए इसका निष्पक्ष विश्लेषण करते हैं। नालंदा विश्वविद्यालय 2. पीछे छूटने के मुख्य कारण (The Historical & Systemic Reasons) औपनिवेशिक शासन (Colonial Impact): ब्रिटिश शासन (विशेषकर लॉर्ड मैकॉले की शिक्षा नीति) ने भारत की पारंपरिक, व्यावहारिक और स्किल-बेस्ड शिक्षा प्रणाली को बदलकर उसे सिर्फ 'क्लर्क' या कर्मचारी पैदा करने वाली व्यवस्था में तब्दील कर दिया। रटने पर ज़ोर ( Rote Learning ): आज की व्यवस्था में सीखने से ज़्यादा 'मार्क्स' (अंकों) और रटने की प्रवृत्...
Bihar Sharif, the administrative headquarters of Nalanda district, is a historically significant city in Bihar that served as the capital of the Pala dynasty in the 10th century. Key historical landmarks include the 5th-century Gupta pillar, the 14th-century tomb of Sufi saint Syed Ibrahim Malik Baya on Pir Pahadi Hill, and the Bari Dargah (tomb of Makhdum Shah Sharfuddin) . Key Historical Sites in and around Bihar Sharif: Tomb of Syed Ibrahim Malik Baya (Pir Pahadi): A 14th-century tomb of a renowned Sufi saint and warrior, situated on a hill, offering historical significance. Bari Dargah : The shrine of Makhdoom Shah Sharfuddin, a 14th-century Sufi saint, which is a major site of pilgrimage and features4 minars. Ancient Ruins : The area is near the ancient Nalanda Mahavihara (a UNESCO World Heritage Site) and contains ruins of brick temples and monasteries. Gupta Pillar : A 5th-century pillar from the Gupta era, highlighting the ancient roots...
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