राज रसोई रेस्टोरेंट

 


बहुत दिनों के बाद चार पुराने दोस्त – हम, दिलचंद, विकास और निशु – एक ही शहर में थे। कॉलेज के दिनों की यारी, साथ बिताए वो बिंदास पल, और अब ज़िंदगी की दौड़ में सब अलग-अलग रास्तों पर निकल गए थे। लेकिन इस बार सबने ठान लिया – मिलना है,और ऐसा मिलना कि यादगार बन जाए।
प्लान बना एक पार्टी का।
जगह तय हुई – राज रसोई रेस्टोरेंट पर।
काम बँटा – खाने की पसंद जिम्मेदारी निशु ने ली, पीने-पिलाने का बिकाश ने संभाला, और माहौल बनाने की जिम्मेदारी दिलचंद की कंधों पर थी।

पार्टी वाले दिन सबने एक बार फिर वही पुराना अंदाज़ अपनाया – हँसी, मज़ाक, और एक-दूसरे की टांग खींचना। विकास ने चिकन लोली पॉप से लेकर पनीर तंदूरी तक, सब कुछ बना रखा था। निशु की 'खास कलेक्शन' ने महफिल को और रौशन कर दिया।
हम – हमेशा की तरह सबसे शांत – लेकिन मुस्कुराहट से सबका दिल जीत लेने वाली निशु और हम? हम वो थे जो सबको फिर से एकसाथ लाए, एक पुराने एल्बम की तरह, जिसमें हर पन्ना यादों से भरा था।
दिन बढ़ती गई, ठहाकों की आवाज़ तेज़ होती गई। गानों की गूंज, लाइट्स की चमक, और दोस्तों की यारी – एक ऐसी पार्टी बनी, जिसे हम सब सालों सालों तक याद रखने वाले थे। 




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