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राजगीर का मलमास मेला

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राजगीर का मलमास मेला हर साल नहीं, बल्कि हर तीसरे साल (प्रत्येक तीन वर्ष में) अधिकमास या मलमास के दौरान लगता है। सनातन धर्म और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और चंद्र वर्ष के दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। राजगीर का मलमास मेला हर साल नहीं, बल्कि हर तीसरे साल (प्रत्येक तीन वर्ष में) अधिकमास या मलमास के दौरान लगता है। सनातन धर्म और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और चंद्र वर्ष के दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।  राजगीर में ही इस पावन मेले के आयोजन और इसकी पौराणिक मान्यताओं के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. 33 करोड़ देवी-देवताओं का प्रवास  हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के पूरे एक महीने के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता और सभी ऋषि-मुनि अपनी लोक छोड़कर राजगीर (प्राचीन नाम राजगृह) में वास करते हैं। इस समय देश के अन्य किसी भी हिस्से में कोई मांगलिक कार्य (जैसे विवाह या मुंडन) नहीं होते, क्योंकि ...