राजगीर का मलमास मेला
राजगीर का मलमास मेला हर साल नहीं, बल्कि हर तीसरे साल (प्रत्येक तीन वर्ष में) अधिकमास या मलमास के दौरान लगता है। सनातन धर्म और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और चंद्र वर्ष के दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
राजगीर का मलमास मेला हर साल नहीं, बल्कि हर तीसरे साल (प्रत्येक तीन वर्ष में) अधिकमास या मलमास के दौरान लगता है। सनातन धर्म और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और चंद्र वर्ष के दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
राजगीर में ही इस पावन मेले के आयोजन और इसकी पौराणिक मान्यताओं के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. 33 करोड़ देवी-देवताओं का प्रवास
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के पूरे एक महीने के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता और सभी ऋषि-मुनि अपनी लोक छोड़कर राजगीर (प्राचीन नाम राजगृह) में वास करते हैं। इस समय देश के अन्य किसी भी हिस्से में कोई मांगलिक कार्य (जैसे विवाह या मुंडन) नहीं होते, क्योंकि सभी शक्तियों का केंद्र राजगीर होता है
2. राजा बसु का महायज्ञ और ब्रह्मा जी के 22 कुंड
वायु पुराण और अन्य कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर की पवित्र भूमि पर एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया था। उन्होंने इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया।
* जाड़े के मौसम में देवताओं को स्नान करने में असुविधा न हो, इसलिए ब्रह्मा जी ने यहाँ 22 पवित्र गर्म जल के कुंड और 52 जलधाराओं को प्रकट किया था।
* इन कुंडों में सबसे प्रमुख ब्रह्मकुंड है, जहाँ स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है।
3. भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) का वरदान
मलमास को पहले 'मलिन मास' (अपवित्र महीना) मानकर उपेक्षित किया जाता था। तब भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम मास' दिया और वरदान दिया कि जो भी इस महीने में राजगीर के पवित्र कुंडों में स्नान, जप-तप और दान-पुण्य करेगा, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी।
4. कौओं का राजगीर छोड़ना (एक अनोखा रहस्य)
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बसु के यज्ञ में सभी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन काग (कौआ) को निमंत्रण नहीं मिला था। इसी वजह से यह मान्यता आज भी जीवंत है कि मलमास के पूरे एक महीने के दौरान राजगीर क्षेत्र में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता है।
मलमास मेला आस्था, इतिहास और सनातन परंपरा का एक अद्भुत संगम है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान (शाही स्नान) के लिए जुटते हैं।
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